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आज की बृज रस धारा पढ़ें

??आज की ब्रज रस धारा ??

दिनांक 03/01/2018

मीरा चरित्र – मैं गोविन्द के गुण गाणा

मीरा जी के महल में प्रभु शालिगराम जी के आगमन का उत्सव विधिवत सम्पन्न हुआ। पहले ठाकुर जी का शंखनाद के साथ अभिषेक ,भजन संकीर्तन , ब्रह्म भोज और फिर प्रसाद ।सबके महलों में प्रसाद बँटा ।उदयकुँवर बाईसा को प्रसाद पाकर बहुत आश्चर्य हुआ तो वह स्वयं मीरा के यहाँ उत्सव का कारण पूछने चली आई। श्यामकुँवर और मीरा प्रसाद पाने बैठने ही लगे थे। तो मीरा ने दासी को कह उदयकुँवर बाईसा की भी थाली साथ ही लगवा ली।” आज कैसा उत्सव है भाभी म्हाँरा ?” उदयकुँवर ने जिज्ञासा वश पूछा।” आज शालिगराम प्रभु पधारे है बाईसा !” मीरा ने प्रसन्नता से कहा।श्यामकुँवर ने प्रसाद पाते पाते सारा वृतान्त बुआ को कह सुनाया। उदयकुँवर सांप के पिटारे की बात सुनकर बहुत क्रोधित हुई -” मैं तों समझी थी कि महाराणा को अब अकल आ गई है। वे भाभीसा को अब पहचान गये है- किन्तु कुछ भी नहीं बदला है। मैं जाकर पूछती हूँ कि यह क्या किया आपने , क्या मेड़तियों को शत्रु बना कर मानेंगे ?” नहीं बाईसा! कुछ नही किसी से भी पूछना है। भाई जयमल के पुत्र मुकुन्द दास भी अभी यहीं है। मेड़ता में ज़रा सा भी भनक पड़ गई तो दोनों तरफ़ की तलवारें भिड़ जायेगीं। मेरा तो कुछ बिगड़ेगा नहीं ,पर हमारी बेटी का पीहर खो जायेगा ” मीरा ने श्यामकुँवर के सिर पर हाथ रखते हुये कहा-” और रही बात मेरी , वो तो वैसे भी परसों  मैं जा ही रही हूँ। “

 उदयकुँवर विह्वल स्वर में भौजाई से लिपटते हुये बोली ,” आप समंदर हो भाभी म्हाँरा !”तभी कुमकुम ठाकुर जी को लेने आ गई ।मीरा उसे और श्यामकुँवर को ले मन्दिर पधारी तो जोशीजी को उसकी इच्छा बताई। ” तुमको कौन से ठाकुर जी अच्छे लगते है – रामजी , कृष्ण जी , एकलिंगनाथ , माता जी याँ कोई ओर ?” मीरा ने पूछा। ” मुझे अच्छे बुरे लगने की अकल कहाँ है सरकार ! “कुमकुम विनम्रता से बोली।” भगवान से एक रिश्ता जोड़ना पड़ता है ,। इसलिए पूछ रही हूँ। तुम्हें बालक चाहिये कि बींद मालिक चाहिए कि चाकर यह बताओ। “” म्हारे तो नान्हा लाला चावे हुकम !”मीरा ने बालमुकुन्द जी को उठाकर जोशीजी के हाथ में दिया। जोशीजी उसे कुमकुम के हाथ में देते हुये बोले -” तुमसे जैसी बन पाये , वैसी पूजा करना और छोटे बालक की तरह ही सार-संभाल करना। आज से ये तेरे लाला है। अपने बालक की तरह ही लाड़ -गुस्सा भी करना। इन्हें खिला कर ही खाना-पीना , इन पर पूरा भरोसा करना ।उसके कान में लाला का गोपाल नाम देते हुए कहा -” इस नाम को कभी नहीं भूलना मत , ज़ुबान को नाम से विश्राम मत देना, समझी ?”कुमकुम ने आँसुओं से भरी आँखों से जोशीजी की ओर देखकर सिर हिलाया। पल्लू से चाँदी का एक रूपया खोलकर जोशीजी के पाँवों के पास रख प्रणाम किया। वहाँ बैठे सबको प्रणाम कर अन्त में उसने मीरा के दोनों चरण पकड़ रोते हुये कहा ,” मैं पापिन आपके लिए मौत की सामग्री लेकर आई थी और आपने मेरे लिए वैकुण्ठ के दरवाज़े खोले ।बस इस दासी पर सदा कृपा करना , भूल मत जाना।
मीरा ने सिर पर हाथ फेर आश्वासन दिया। जोशीजी के आग्रह से मीरा ने मन्दिर में गिरधर के समक्ष, जाने से पहले एक पद गाया…….मैं गोविन्द के गुण गाणा ।राजा रूठै नगरी राखै ,हरि रूठयाँ कह जाणा ॥राणा भेज्या ज़हर पियाला ,इमरित करि पी जाणा  ॥डबिया में भेज्या दुई भुजंगम सालिगराम कर जाणा  ॥मीरा तो अब प्रेम दिवानी ,साँवरिया वर पाणा  ॥मैं गोविन्द के गुण गाणा ॥
          “श्री श्याम सुन्दर गोस्वामी जी “

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