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आज की बृज रस धारा

श्री राधे 

“श्रील नारायण भट्ट ज़ू जयति”

“श्री नारायण दास गोस्वामी जयति”

??आज की ब्रज रस धारा  

दिनांक 22/06/2018

करवट उत्सव

भगवान कृष्ण के उत्सव इतने है कि साल में ३६५ दिन है और भक्तजन ३७० उत्सव मानते है जब भगवान ने पहली बार छीका,

जब उगली से इशारा किया,जव बोलना शुरू किया,चलना शुरू किया,पहली बार खाया.

इन्ही में से एक है भगवान का ‘करवट उत्सव’, जब भगवान ने करवट बदली.

एक बार यशोदा मैया ने भगवान को चित पलग पर सुलाया, जब मैया काम करके थोड़ी देर बाद आई,

तो उन्होंने देखा की लाला ने स्वयं करवट ली है, तो वे बड़ी प्रसन्न हुई और उसी दिन भगवान का जन्म नक्षत्र भी था.

उस दिन घर में भगवान के करवट बदने का ‘अभिषेक-उत्सव’ मनाया जा रहा था.

घर में बहुत सी स्त्रियों की भीड़ लगी हुई थी,गाना बजाना हो रहा था,

यशोदा जी ने पुत्र का अभिषेक किया.उस समय ब्राह्मण लोग मंत्र पढ़कर आशीर्वाद दे रहे थे,

नंदरानी यशोदा जी ने ब्राह्मणों का खूब पूजन-सम्मान किया,उन्हें अन्न, वस्त्र, माला, गाय, आदि मुँहमाँगी वस्तुएँ दी.

जब यशोदा ने उन ब्राह्मणों द्वारा स्वस्तिवाचन कराकर स्वयं बालक के नहलाने आदि का कार्ये संपन्न कर लिया,

तब ये देखकर कि मेरे लल्ला के नेत्रों में नींद आ रही है,अपने पुत्र को धीरे से शय्या पर सुला दिया,

थोड़ी देर में श्यामसुन्दर की आँखे खुली,तो वे दूध के लिए रोने लगे.

उस समय यशोदा जी उत्सव में आये हुए ब्रजवासियो के स्वागत सत्कार में बहुत ही तन्मय थी .

इसलिए उन्होंने श्रीकृष्ण का रोना सुनायी नहीं पड़ा,तब श्रीकृष्ण रोते-रोते अपने पाँव उछालने लगे,

श्रीकृष्ण एक छकडे़ के नीचे सोये हुए थे उनके पाँव अभी लाल-लाल कोपलों के समान बड़े ही कोमल और नन्हे-नन्हे थे

परन्तु वह नन्हा-सा पाँव लगते ही विशाल छकडा़ उलट गया*

उस छकडे पर दूध दही आदि अनेक रसो से भरी हुई मटकियाँ और दूसरे बर्तन रखे हुए थे

वे सब-के- सब फूट-फाट गये और छकडे़ के पहिये तथा धुरे अस्त-व्यस्त हो गये, उनका जुआ फट गया.

करवट बदलने के उत्सव में जितनी भी स्त्रियाँ आई हुई थी वे सब-के-सब और यशोदा, रोहिणी, नंदबाबा, और गोपगण इस विचित्र घटना को देखकर व्याकुल हो गये वे आपस में कहने लगे

अरे!ये क्या हो गया ?यह छकडा़ अपने-आप कैसे उलट गया ?वे इसका कोई कारण निश्चित ना कर सके

वहाँ खेलते बालको ने कहा इस कृष्ण ने ही रोते-रोते अपने पावँ की ठोकर से इसे उलट दिया है .

परन्तु बालको की बात पर किसी ने विश्वास नहीं किया .

यशोदा जी ने अपने रोते हुए लाडले लाल को गोद में लेकर ब्राह्मणों से वेदमंत्रो के द्वारा शांतिपाठ कराया.

*हिरण्याक्ष का पुत्र था उत्कच .वह बहुत बलवान था,

एक बार उसने लोमश ऋषि के आश्रम के वृक्षों को कुचल डाला लोमश ऋषि ने क्रोध करके शाप दे दिया- अरे दुष्ट ! जा, तू देह रहित हो जा.

उसी समय उसका शरीर गिरने लगा वह ऋषि के चरणों में गिर पड़ा और प्रार्थना की.

तो ऋषि ने कहा -वैवस्वत मन्वंतर में श्रीकृष्ण के चरण-स्पर्श से तेरी मुक्ति हो जायेगी वही असुर छकडे़ में आकर बैठ गया था

और भगवान के चरण स्पर्श मुक्त हो गया .

सार 

यशोदा जी ने दूध-दही की मटकिंयो को तो ऊपर रख दिया

और भगवान को नीचे सुला दिया उसी प्रकार हम भी यह गलती करते है सांसारिक वस्तुओं को ऊपर रखते है

भगवान बाद में रखते है पर भगवान उन सांसारिक वस्तुओं तोड़ देते है.  

“ जय जय श्री राधे ”

          “श्री श्याम सुन्दर गोस्वामी जी ”

      सेवाधिकारी श्री राधा रानी मन्दिर बरसाना 

          श्री जी बरसाना मण्डल ट्रस्ट (रजि०)

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