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राधे तेरे चरणों की श्यामा तेरे चरणों की

रज धूल जो मिल जाए

सच कहती हूँ प्यारी तक़दीर बदल जाए

तेरे चरणों में हो जीवन की शाम

किशोरी यही माँग मेरी

 

श्री राधा श्री राधा श्री राधा राधा

श्री राधा श्री राधा श्री राधा राधा

बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

मीरा पुकारी जब गिरिधर गोपाला
ढल गया अमृत में विष का भरा प्याला

ढल गया अमृत में विष का भरा प्याला
ढल गया अमृत में विष का भरा प्याला

कौन मिटाए उसे, जिसे तू राखे पिया
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया

जब तेरी गोकुल पे आया दुख भारी
जब तेरी गोकुल पे आया दुख भारी

एक इशारे से सब विपदा टारी
एक इशारे से सब विपदा टारी

मुड़ गया गोवर्धन तुने जित मोड़ दिया
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया

नैनो में श्याम बसे, मन में बनवारी
नैनो में श्याम बसे, मन में बनवारी

सुध बिसराये गई मुरली की धुन प्यारी
सुध बिसराये गई मुरली की धुन प्यारी

मन के मधुबन में रास रचाए रसिया
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

बृज के नंदलाला राधा के सांवरिया
सभी दुःख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया

भाण्डीरवन का रहस्य:

 

भाण्डीरवन, वृन्दावन से लगभग १० किलोमीटर दूर यमुना पार छायरी गाँव के पास तहसील मॉठ, जिला मथुरा में हैं |

 

गर्ग संहिता के आधार पर भाण्डीरवन में ब्रह्मा जी ने राधा कृष्णा का गन्धर्व विवाह कराया था, इसीलिए यहाँ पर मंदिर में श्री कृष्ण के द्वारा राधा रानी की मांग भरते हुए दर्शन हैं |

 

यहाँ एक ऐसा कुंआ है जिसका रंग सोमवती अमावस्या को दूधिया हो जाता है |

लीलायॆं :

• यहाँ पर गोचारण के समय, श्री कृष्ण और बलराम जी का ग्वाल-
बालो के साथ भोजन-क्रीड़ा कौतुका हैं। 

 

• यहाँ विशाल भाण्डीर-वट की लम्बी-लम्बी शाखाओं पर चढ़कर कृष्ण और सखाओं की, यमुना के पार जाने- आने की क्रीड़ा हैं। 

 

• यहाँ ब्रजाड़ग़नाओ के साथ श्री कृष्ण की मल्ल-क्रीड़ा हैं। 

 

• सखाओं के साथ श्री कृष्ण और बलराम की भोजन-क्रीड़ा के समय गायों और ग्वाल- बालो का मुज्ज्वन में प्रवेश और उनकी दावानल से रक्षा की क्रीड़ा हैं। 

 

• यहाँ वत्सासुर बध की पाप की शुद्धि के लिए श्री कृष्ण द्वारा अपने बेणु से बेणु कूप निर्माण कर उसमे समग्र तीर्थो का आवाहन कर, उसमे स्वंय स्नान द्वारा पवित्र होने की लीला हैं। 

 

• यहाँ प्रलम्बासुर की उद्धार-लीला हैं और समीप ही बंशी वट पर रासलीला हैं |

पाऊँ तिहारो प्रेम किशोरी छकि फिरू में ब्रज की गोरी

सरस किशोरी वयस की थोरी रति रस भोरि

कीजे कृपा की कोर

ब्रज के नंदलाला श्री राधा ज़ू के साँवरिया

सब दुःख दूर हुए जब तेरा नाम लिया

होरी खेलत नंदलाल बृज में, होरी खेलत नंदलाल।
ग्वाल बाल संग रास रचाए, नटखट नन्द गोपाल॥

बाजत ढोलक झांझ मजीरा,
गावत सब मिल आज कबीर।
नाचत दे दे ताल, होरी खेलत नंदलाल…

भर भर मारे रंग पिचकारी,
रंग गए बृज के नर नारी।
उड़त अबीर गुलाल, होरी खेलत नंदलाल…

ऐसी होरी खेली कन्हाई,
यमुना तट पर धूम मचाई।
रास रचे नंदलाल, होरी खेलत नंदलाल…

Shree Ji Barsana Mandal Trust (SJBMT)